मंगलवार, 24 मार्च 2015

प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र

“सफलता के शिखर पे कहां फ़ुरसत कि कुछ सोचें
 मगर जब चोट लगती है मुकद्दर याद आता है”

“ज्योतिर्विद” हेमन्त रिछारिया

यदि आप अपनी जन्म-पत्रिका बनवाना चाहते हैं या अपनी जन्म-पत्रिका का विश्लेषण करवाना चाहते हैं तो मुझसे ई-मेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं। हमारे यहां जन्मपत्रिका निर्माण, जन्म पत्रिका विश्लेषण,जन्मपत्रिका मिलान, रत्न-परामर्श,लाल किताब के अनुसार फलादेश, ग्रह शांति आदि का कार्य किया जाता है।                                                                                                                                                                                                                          

संपर्क करें-
"ज्योतिर्विद" हेमन्त रिछारिया
(“ज्योतिष प्रभाकर” एवं “ज्योतिर्विद” की उपाधि प्राप्त)


हमारा ई-मेल पता है- astropoint_hbd@yahoo.com

रत्न धारण में सावधानी रखें

कई लोगों को रत्न धारण करने शौक होता है। कुछ अल्प ज्ञानी ज्योतिषी भी इस शौक के लिए जिम्मेवार होते हैं जिनका अक्सर रत्न बेचने वालों से बड़ा गहरा संबंध होता है इसलिए जब भी मैं किसी मित्र को रत्न ना धारण करने सलाह देता हूं तो उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहता। कुछ मित्र मायूस भी हो जाते हैं। सामान्यतः ज्योतिष के क्षेत्र में राशि रत्न, लग्नेश का रत्न, विवाह के गुरू का रत्न, तो आजकल एक नया फ़ैशन लाकेट का चल निकला है जिसमें ज्योतिषीगण लग्नेश,पंचमेश व नवमेश के रत्नों का लाकेट बनवाकर पहनने का परामर्श देते हैं। मेरे देखे ऐसा करना अनुचित है। रत्नों के धारण करने में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। रत्नों को धारण करने से पहले उन ग्रहों की जन्मपत्रिका में स्थिति व अन्य ग्रहों से संबंध का ज्ञान होना अतिआवश्यक है, चाहे वे रत्न लग्नेश अथवा राशीश के ही क्यों ना हों। यह भी देखना आवश्यक है कि जिस ग्रहा रत्न धारण कर रहे हैं वह किस ग्रह से क्या संबंध बना रहा है अथवा किस ग्रह से अधिष्ठित राशि का स्वामी है। यदि एकाधिक रत्न धारण की स्थिति बन रही हो तो वर्जित रत्नों का ध्यान भी रखा जाना आवश्यक है। पंचधा मैत्री में ग्रहों के आपसी संबंध की भी रत्न धारण में महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
एक सर्वथा गलत धारणा यह है कि रत्न हमेशा ग्रह शांति के लिए पहना जाता है जबकि वास्तविकता इसे ठीक विपरीत है, रत्न हमेशा ग्रह के बल में वृद्धि करने के लिए धारण किया जाता है। कुछ रत्न ग्रहशांति के उपरान्त अल्प समयावधि के लिए ही धारण किए जाते हैं। अतः रत्न धारण करने से पूर्व अत्यंत सावधानी रखते हुए रत्न धारण करने से पूर्व किसी श्रेष्ठ ज्योतिषी से भलीभांति परामर्श के बाद ही रत्न धारण करें अन्यथा लाभ के स्थान पर हानि हो सकती है।
-ज्योतिर्विद हेमन्त रिछारिया

ज्योतिष को “विंडो शापिंग” ना समझें

यात्रा के दौरान या किसी समारोह में जब मैं अपना परिचय एक ज्योतिषी के रूप में देता हूं तब बड़ी रोचक प्रतिक्रियाएं देखने को मिलती हैं। कुछ लोग इसे अंधविश्वास को बढ़ाने वाली ठग विद्या सिद्ध करने के लिए कुतर्क करने लगते हैं, कुछ परीक्षक की भांति मेरे ज्ञान का परीक्षण करने लगते हैं तो कुछ झट अपनी कुण्डली निकालकर या पास ही पड़े किसी कागज़ पर कुण्डली उकेरकर फ़लित पूछने लगते हैं। मेरा इस प्रकार का व्यवहार करने वाले तमाम महानुभावों से यही निवेदन है कि ज्योतिष कोई “विंडो शापिंग” नहीं है कि आप यूं ही तफ़री के लिए बाज़ार गए वहां निरूद्देश्य दुकानों पर ताक-झांक करते हुए कोई वस्तु पसन्द आ गई और दुकानदार से मोल-भाव जम गया तो खरीद ली अन्यथा आगे बढ़ गए। यहां मुझे रामायण का रावण -वध प्रसंग स्मरण आ रहा है। जब प्रभु श्रीराम ने भूमि पर गिरे अंतिम सांसे गिनते रावण की ओर इशारा कर लक्ष्मण जी को आदेश दिया कि जाओ इस महापंडित से उपदेश ग्रहण करो तब लक्ष्मण जी रावण के सिर की ओर जाकर खड़े हो गए तब रावण ने यह कहते हुए अपना मुंह फ़ेर लिया कि लक्ष्मण जब हम किसी से कुछ ग्रहण करने जाते हैं तो याचक की भांति जाना चाहिए तब लक्ष्मण जी रावण के पैर की तरफ़ जाकर बैठे किंतु पुनः रावण ने यह कहते हुए मुंह फ़ेर लिया किया जब भी किसी विद्वान से भेंट करने जाओ
तो खाली हाथ नहीं जाना चाहिए तब कहते हैं लक्ष्मण जी वहीं भूमि से एक तिनका उठाकर महापंडित रावण को भेंट किया तब जाकर रावण ने लक्ष्मण को उपदेश दिया। कहने का तात्पर्य यह है कि हर कार्य की एक मर्यादा होती है; एक उचित तरीका होता है, उस मर्यादा से परे जाकर उस कार्य को करना मेरे देखे पाप करने जैसा है। विद्वानों को चाहिए कि महत्वपूर्ण कार्यों की मर्यादा एवं उचित मार्ग के संबंध में जनमानस को मार्गदर्शित करें।

-ज्योतिर्विद हेमन्त रिछारिया

सोमवार, 15 दिसंबर 2014

त्रि-आयामी है “ज्योतिष”

ज्योतिषियों से एक प्रश्न अक्सर पूछा जाता है कि “जब एक ही समय पर विश्व में कई बच्चे जन्म लेते हैं तो उनकी जन्मकुण्डली एक होने के बावजूद उनका जीवन भिन्न कैसे होता है?” ज्योतिष पर विश्वास नहीं करने वालों के लिए यह प्रश्न ब्रह्मास्त्र की तरह है। यह प्रश्न बड़े से बड़े ज्योतिष के जानकार की प्रतिष्ठा को ध्वस्त करने की सामर्थ्य रखता है। जब इस ब्रह्मास्त्र रूपी प्रश्न का प्रहार मुझ पर किया गया तो मैंने ढाल के स्थान पर ज्योतिष शास्त्र रूपी अस्त्र से ही इसे काटना श्रेयस्कर समझा। इस प्रश्न को लेकर मैंने बहुत अनुसंधान किया, कई वैज्ञानिकों के ब्रह्माण्ड विषयक अनुसंधान के निष्कर्षों की पड़ताल की, कई सनातन ग्रंथों को खंगाला और अपने कुछ वर्षों के ज्योतिषीय अनुभव को इसमें समावेशित करते हुए मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि किसी जातक के जीवन निर्धारण में केवल जन्म-समय ही नहीं अपितु गर्भाधान-समय और उसके प्रारब्ध (पूर्व संचित कर्म) की भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस प्रकार ज्योतिष तीन आयामों पर आधारित है, ये तीन आयाम हैं-१. प्रारब्ध २. गर्भाधान ३.जन्म। इन्हीं तीन महत्वपूर्ण आयामों अर्थात् जन्म-समय, गर्भाधान-समय एवं प्रारब्ध के समेकित प्रभाव से ही किसी जातक का संपूर्ण जीवन संचालित होता है। किसी जातक की जन्मपत्रिका के निर्माण में जो सर्वाधिक महत्वपूर्ण तत्व है; वह है- समय। अब जन्म-समय को लेकर भी ज्योतिषाचार्यों में मतभेद है, कुछ विद्वान शिशु के रोने को ही सही मानते हैं, वहीं कुछ नाल-विच्छेदन के समय को सही ठहराते हैं, खैर; यहां हमारा मुद्दा जन्म-समय नहीं है। किसी भी जातक की जन्मपत्रिका के निर्माण के लिए उसके जन्म का समय ज्ञात होना अति-आवश्यक है। अब जन्मसमय तो ज्ञात किया जा सकता है किंतु गर्भाधान का समय ज्ञात नहीं किया जा सकता इसीलिए हमारे शास्त्रों में “गर्भाधान” संस्कार के द्वारा उस समय को बहुत सीमा तक ज्ञात करने व्यवस्था  है। यह अब वैज्ञानिक अनुसंधानों से स्पष्ट हो चुका है कि माता-पिता का पूर्ण प्रभाव बच्चे पर पड़ता है, विशेषकर मां का, क्योंकि बच्चा मां के ही पेट नौ माह तक आश्रय पाता है। आजकल सोनोग्राफ़ी और डीएनए जैसी तकनीक इस बात को प्रमाणित करती हैं। अतः जिस समय एक दंपत्ति गर्भाधान कर रहे होते हैं उस समय ब्रह्माण्ड में नक्षत्रों की व्यवस्था और ग्रहस्थितियां भी होने वाले बच्चे पर पूर्ण प्रभाव डालती हैं। इस महत्वपूर्ण तथ्य को ध्यान में रखते हुए हमारे शास्त्रों में “गर्भाधान” के मुर्हूत की व्यवस्था है। गर्भाधान का दिन, समय,तिथि,वार,नक्षत्र,चंद्र स्थिति, दंपत्तियों की कुण्डलियों का ग्रह-गोचर आदि सभी बातों का गहनता से परीक्षण करने के उपरान्त ही “गर्भाधान” का मुर्हूत निकाला जाता है। अब यदि किन्हीं जातकों का जन्म इस समान त्रिआयामी व्यवस्था में होता है (जो असंभव है) तो उनका जीवन भी ठीक एक जैसा ही होगा इसमें तनिक भी संदेह नहीं है। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि हमें इन तीन आयामों में से केवल एक ही आयाम अर्थात् जन्म-समय ज्ञात होता है, दूसरा आयाम अर्थात् गर्भाधान-समय हमें सामान्यतः ज्ञात नहीं होता किंतु उसे ज्ञात किया जा सकता है परन्तु तीसरा आयाम अर्थात् प्रारब्ध ना तो हमें ज्ञात होता है और ना ही सामान्यतः उसे ज्ञात किया जा सकता है इसलिए इस समूचे विश्व में एक ही समय जन्म लेने वाले व्यक्तियों का जीवन एक-दूसरे से भिन्न पाया जाता है। मेरे देखे ज्योतिष मनुष्य के भविष्य को ज्ञात करने की पद्धति का नाम है, ये पद्धतियां भिन्न हो सकती हैं। इन पद्धतियों को समय के साथ अद्यतन(अपडेट) करने की भी आवश्यकता है। एक योगी भी किसी व्यक्ति के बारे उतनी ही सटीक भविष्यवाणी कर सकता है जितनी एक जन्मपत्रिका देखने वाला ज्योतिषी या एक हस्तरेखा विशेषज्ञ कर सकता है और यह भी संभव है कि इन तीनों में योगी सर्वाधिक प्रामाणिक साबित हो। “ज्योतिष” एक समुद्र की भांति अथाह है इसमें जितना गहरा उतरेंगे आगे बढ़ने की संभावनाएं भी उतनी ही बढ़ती जाएंगी। जब तक भविष्य है तब तक ज्योतिष भी है। अतः ज्योतिष के संबंध में क्षुद्र एवं संकुचित दृष्टिकोण अपनाकर केवल अपने अहं की तुष्टि के लिए प्रश्न उठाने के स्थान पर इसके वास्तविक विराट स्वरूप को समझकर जीवन में इसकी महत्ता स्वीकार करना अपेक्षाकृत अधिक लाभप्रद है।

-ज्योतिर्विद हेमन्त रिछारिया

वैदिक अनुष्ठान करवाएं

वैदिक अनुष्ठानों करवाने के लिए संपर्क करें-


यदि आप अपनी वर्षगांठ, पुत्र-पुत्री के जन्मोत्सव, विवाह वर्षगांठ, पुण्यस्मरण, आदि के अवसर पर वैदिक ब्राह्मणों द्वारा विशेष वैदिक अनुष्ठान संपन्न करवाना चाहते हैं या ज्योतिष शिविर एवं आध्यात्मिक परिचर्चा आयोजित करवाना चाहते हैं तो “प्रारब्ध ज्योतिष संस्थान” के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। हमारे यहां उच्च प्रशिक्षित श्रेष्ठ ब्राह्मणों द्वारा निम्न वैदिक अनुष्ठान संपन्न करवाए जाते हैं।


अनुष्ठान का नाम-
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१. राजराजेश्वरी मां ललिताम्बिका सहस्त्रार्चन अनुष्ठान
२. संगीतमय रुद्राभिषेक एवं महाआरती
३. संगीतमय सहस्त्रधारा रुद्राभिषेक
४. संगीतमय द्वादश ज्योर्तिलिंग रुद्राभिषेक
५. सवालक्ष पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं रुद्राभिषेक
६. मां बगलामुखी अनुष्ठान
७. महाआरती
८. दीपार्चन
९. गौ पूजा
१०.महामृत्युंजय अनुष्ठान
११. नवग्रह शांति

हमारा पता है- प्रारब्ध ज्योतिष संस्थान
“ज्योतिर्विद” हेमन्त रिछारिया, 
 हमारा ई-मेल पता है:- astropoint_hbd@yahoo.com

शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2014

ज्योतिष एक विशुद्ध विज्ञान है-

मित्रों, ज्योतिष को विज्ञान कहने पर अक्सर तार्किकों और ज्योतिषियों में बहस होती है। मेरे देखे ज्योतिष एक विशुद्ध विज्ञान है लेकिन उस रूप में नहीं जिस रूप में तथाकथित ज्योतिष इसे सिद्ध करने की असफ़ल कोशिश करते हैं। ज्योतिष को उसके व्यवहारिक रूप में समझना अति-आवश्यक है तभी हम इसके वैज्ञानिक पक्ष को भलीभांति समझ पाएंगे। इस बावत कई वैज्ञानिकों एवं विद्वानों पूर्व में कई अनुसंधान कर निष्कर्ष निकाले हैं जो यह सिद्ध करते हैं कि ज्योतिष एक विज्ञान है। हम ऐसे ही कुछ निष्कर्ष यहां प्रस्तुत कर रहे हैं।

१-प्रसिद्ध चिकित्सा शास्त्री पैरासिलीसस ने अपने अनुसंधानों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि कोई व्यक्ति तब बीमार पड़ता है जब उसके वर्तमान नक्षत्र और जन्म नक्षत्र में बीच अंर्तसंबंध बिगड़ जाता है। वे अपने दवा देने से पूर्व अपने मरीजों की जन्मकुण्डली देखा करते थे। उनका कहना था कि जब तक वे ये ना जान लें कि मरीज़ किस नक्षत्र व्यवस्था में पैदा हुआ है उसका अंर्तसंगीत पकड़ना संभव नहीं और बिना अंर्तसंबध जाने वे उसकी गड़बड़ी ठीक नहीं कर सकते। पैरासिलीसस के बारे मशहूर था कि वे ऐसे मरीजों को भी ठीक कर देते थे जिन्हें बड़े से बड़े चिकित्सक भी ठीक नहीं कर पाते थे।

२- ईसा से पांच सौ वर्ष पूर्व यूनान में पाइथागोरस ने प्लेनेटरी हार्मनी (ग्रहीय अंर्तसंगीत) के बहुमूल्य सिद्धांत को जन्म दिया। पाइथागोरस का यह मानना था कि प्रत्येक ग्रह या नक्षत्र जब यात्रा करता है अंतरिक्ष में तो उसकी यात्रा से एक विशेष ध्वनि पैदा होती है। जब कोई मनुष्य जन्म लेता है तब उस जन्म के क्षण में इन नक्षत्रों व ग्रहों के बीच संगीत व्यवस्था है वह उस व्यक्ति के चित्त पर अंकित हो जाती है जो उसे जीवन पर्यंत प्रभावित करती है।

३-सन १९५० में जियाजारजी गिआरडी ने एक नए विज्ञान को जन्म दिया। जिसका नाम है-कास्मिक केमिस्ट्री; ब्रह्माण विज्ञान। इस वैज्ञानिक ने अपने प्रयोगों से इस बात को सिद्ध कर दिया कि समस्त जगत एक आर्गेनिक यूनिटी है। पूरा जगत अंर्तसंबंधित है ठीक शरीर की भांति। जिस प्रकार यदि मनुष्य शरीर के पैर के अंगूठे में चोट लगती है उस चोट के कारण पूरा शरीर प्रभावित होता है ठीक उसी प्रकार यदि ब्रह्माण में कुछ ग्रहों का परिवर्तन होता है तो उससे भी मनुष्य और प्रकृति दोनों प्रभावित होती हैं।

-ज्योतिर्विद हेमन्त रिछारिया


राशि रत्न,रुद्राक्ष व यंत्र प्राप्त करें-

यदि आप उच्च गुणवत्ता वाले सर्टिफाइड राशि रत्न ,रुद्राक्ष अभिमंत्रित कवच व यंत्र प्राप्त करना चाहते हैं तो “प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केंद्र” में संपर्क करें। हमारे यहां निम्न अभिमंत्रित कवच,यंत्र,रुद्राक्ष एवं सर्टिफाइड राशि रत्न उपलब्ध है-

 

 राशि रत्न 

माणिक्य
मोती
मूंगा
पन्ना
पुखराज
हीरा
नीलम
गोमेद
लहसुनिया
ओपल व हकीक

चमत्कारिक यंत्र- 

मित्रों, आपने पुस्तकों में एवं बाज़ारों में तरह-तरह के यंत्र देखें होंगे। कई बार आपने इन्हें खरीद कर अपने आपको ठगा हुआ भी महसूस किया होगा। अब आप जब भी किसी यंत्र के बारे में देखते या सुनते हैं आपको लगता होगा कि यह भी मूर्ख बनाने का कोई नया तरीका है किंतु ऐसा नहीं है। हमारे शास्त्रों में यंत्रों का निर्माण व प्रयोग की अद्भुत विधियां बताई गई हैं। जो विशेष मुहूर्त में, विशेष मंत्रों द्वारा सिद्ध कर बनाए जाते हैं। यदि यंत्र विषेष मुर्हूत में अभिमंत्रित नहीं है तो वह अपना प्रभाव नहीं दिखा पाता है ऐसे में आप अपने को ठगा हुआ महसूस करते हैं। आप मित्रों की सहायतार्थ हमने अपने संस्थान में इन यंत्रो को अभिमंत्रित करने का कार्य प्रारंभ किया एवं पाया कि जिन मित्रों ने भी हमारे संस्थान से अभिमंत्रित करवाकर यंत्र प्राप्त किए हैं वे लाभान्वित हुए हैं। इसके पीछे मुख्य वजह है हमारे संस्थान के विप्रों द्वारा विशेष मुहूर्त में समुचित विधि द्वारा यंत्रों को यजमान के निमित्त अभिमंत्रित किया
जाना। यदि आप भी हमारे संस्थान से अभिमंत्रित यंत्र प्राप्त करना चाहते हैं तो हमारे संस्थान से संपर्क करें। ये सभी यंत्र गोल्ड प्लेटेड हैं एवं इनके साथ इनकी पूजा विधि,स्त्रोत व माला आदि साथ में दी जाती हैं।
हमारा ई-मेल पता है- astropoint_hbd@yahoo.com


व्यापार वृद्धि यंत्र-

जिन मित्रों का व्यापार मंद हो या लगातार व्यापार में निरन्तर नुकसान हो रहा हो वे “अभिमंत्रित व्यापार वृद्धि यंत्र” को अपने प्रतिष्ठान में स्थापित करें, लाभ होने लगेगा।
 न्यौछावर राशि-११००/रू. मात्र (डाक व्यय अतिरिक्त)


वास्तुदोष के मुक्ति देता है “वास्तुदोषनाशक यंत्र”-

जिन मित्रों के घर में वास्तु दोष के कारण अशांति रहती हो वे अभिमंत्रित वास्तुदोष नाशक यंत्र को अपने घर या प्रतिष्ठान में स्थापित कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
गोल्ड प्लेटेड मंत्रसिद्ध वास्तुदोषनाशक यंत्र का मूल्य है-११००/ रू. मात्र (डाक व्यय अतिरिक्त)

 

 सर्वकार्य सिद्धि यंत्र-

जिन मित्रों के कार्यों में अक्सर बाधाएं आती हों उनके लिए “सर्वकार्य सिद्धि यंत्र” एक अचूक औषधि के तरह है। इस यंत्र की नित्य पूजा से कार्यों में आने वाली बाधाओं का शमन होकर कार्य सफल होते हैं।
अभिमंत्रित सर्वकार्य सिद्धि यंत्र का मूल्य है-११००/-रू. (डाक व्यय अतिरिक्त)

 

अष्टलक्ष्मी यंत्र-

जिन मित्रों के जीवन आर्थिक समस्याएं हो वे अभिमंत्रित “अष्टलक्ष्मी यंत्र” को अपने घर अथवा प्रतिष्ठान में स्थापित आर्थिक समस्याओं से मुक्ति पाकर स्थाई लक्ष्मी प्राप्त कर सकते हैं।
मंत्रसिद्ध अष्टलक्ष्मी यंत्र का मूल्य है-११००/रू. (डाक व्यय अतिरिक्त)

 

सरस्वती यंत्र-

जिन बच्चों का मन विद्याध्ययन में नहीं लगता हो या उनकी स्मरण शक्ति कमज़ोर हो वे अभिमंत्रित “सरस्वती यंत्र” की नित्य पूजा करें एवं सरस्वती मंत्र का ११ बार जाप करें। इसके करने से विद्याध्ययन में आनेवाली बाधाएं दूर होती हैं।
अभिमंत्रित सरस्वती यंत्र का मूल्य है-११००/- रू.(डाक व्यय अतिरिक्त)

 

गृहक्लेश निवारण यंत्र-

जिन मित्रों के घर अशांति या क्लेश का वातावरण रहता हो उन्हें अभिमंत्रित “गृहक्लेश निवारण यंत्र” की पूजा करने से लाभ होता है। घर में सुख-शांति का वातावरण बनता है।
“गृहक्लेश निवारण यंत्र” का मूल्य-११००/ रू. मात्र (डाक व्यय अतिरिक्त)

 

बगलामुखी यंत्र-

जो मित्र शत्रु पीड़ा से पीड़ित हों उन्हें अभिमंत्रित बगलामुखी यंत्र की नित्य पूजा करने से शत्रु भय से मुक्ति मिलती है। यह यंत्र चुनाव में सफ़लता, मुकदमें में विजय, शत्रु स्तंभन में रामबाण औषधि की तरह कार्य करता है।
अभिमंत्रित बगलामुखी यंत्र का मूल्य-१५००/ (डाक व्यय अतिरिक्त)

 

दुर्गा बीसा यंत्र-

यदि आप जीवन में हर प्रकार की सुख-समृद्धि प्राप्त करना चाहते हैं तो “दुर्गा बीसा” यंत्र की नित्य पूजा करने से आप जीवन में सफ़लता प्राप्त कर सकते हैं।
दुर्गा बीसा यंत्र का मूल्य है-११००/ रू. (डाक व्यय अतिरिक्त)

 

कनकधारा यंत्र-

यदि आप अपने जीवन में स्थाई लक्ष्मी प्राप्त करना चाहते हैं तो अपने घर या प्रतिष्ठान में “कनकधारा यंत्र” की स्थापना कर स्थाई लक्ष्मी प्राप्त कर सकते हैं।
कनकधारा यंत्र का मूल्य है-११००/ रू. (डाक व्यय अतिरिक्त)

हमारा ई-मेल पता है- astropoint_hbd@yahoo.com



 “रुद्राक्ष” -

“रुद्राक्ष” का वृक्ष एक उष्णकटिबंधीय एवं समशीतोष्ण कटिबंधीय वनस्पति है। “रुद्राक्ष” का वृक्ष एक सदाबहार वनस्पति है। इसकी पत्ती चमकदार व लम्बी होती एवं तना कठोर,बेलनाकार व लम्बा होता है। इसकी छाल का रंग भूरा या सफ़ेद होता है। रुद्राक्ष के वृक्ष का फ़ूल सफेद रंग का होता है। इसका फल शुरू में हरा एवं पकने के उपरांत नीला व सूखने पर काला हो जाता है। “रुद्राक्ष” इसी फल की गुठली को कहते हैं। हमारे शास्त्रों में “रुद्राक्ष” को भगवान शिव के नेत्रों के सदृश्य माना है। मुख्य रूप से “रुद्राक्ष” की तीन प्रजातियां होती हैं-
१. नेपाली रुद्राक्ष
२. इंडोनेशियाई रुद्राक्ष
३. भारतीय रुद्राक्ष
“रुद्राक्ष” का औसत आकार २०-२२ मिमी. का होता है। “रुद्राक्ष” में प्राकृतिक रूप से छिद्र व धारियां होती हैं जिन्हें “मुख” कहा जाता है। शास्त्रों में १ से १४ मुखी तक के “रुद्राक्ष” का वर्णन मिलता है किंतु नेपाली रुद्राक्ष १ से २१ मुखी तक होते हैं। “रुद्राक्ष” प्रमुखतः चार आकारों में पाए जाते हैं-
१. गोल
२. बेलनाकार
३. चपटे
४. अर्द्धचंद्राकार
इसमें गोल “रुद्राक्ष” सर्वश्रेष्ठ होता है। एक मुखी “रुद्राक्ष” को साक्षात भगवान शिव का रूप माना जाता है।

गलत मान्यताएं-
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-तांबे के दो सिक्कों के बीच घूमने वाला रुद्राक्ष ही असली है!
-पानी पर तैरने वाला रुद्राक्ष ही असली होता है।
-टहनियों पर लगे रुद्राक्ष ही असली होते हैं जैसा कि कुछ तीर्थ स्थानों पर पेड़ की छोटी-छोटी टहनियों को लेकर कुछ लोग घूमते रहते हैं। “रुद्राक्ष” एक फल की गुठली होता है।

विशेष रुद्राक्ष-


एक से लेकर चौदह/इक्कीस मुखी तक के रुद्राक्षों के अलावा कुछ विशेष रुद्राक्ष भी पाए जाते हैं। जिन्हें कुछ विशेष समस्याओं के निदान हेतु धारण किया जाता है। विशेष रुद्राक्ष इस प्रकार हैं-

“गौरीशंकर रुद्राक्ष”-


गौरीशंकर रुद्राक्ष वैवाहिक समस्याओं के निदान में चमत्कारिक शक्ति रखता है। जिन जातकों के विवाह में  परेशानी अथवा विलम्ब होता है उन्हें “गौरीशंकर रुद्राक्ष” धारण करने से लाभ होता है।

“गर्भगौरी रुद्राक्ष”-


गर्भगौरी रुद्राक्ष को मां गौरी का साक्षात स्वरूप माना जाता है। जिन स्त्री जातको संतान सुख नहीं है उन्हें गर्भगौरी रुद्राक्ष के धारण करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है।

“गणेश रुद्राक्ष”-


गणेश रुद्राक्ष के धारण करने से जातक की आर्थिक व पारिवारिक समस्याओं का निदान होता है।

भाग्योदय कारक रुद्राक्ष माला-

 

यदि आप अपनी लग्नानुसार सिद्ध भाग्योदय कारक रुद्राक्ष माला प्राप्त करना चाहते हैं तो शीघ्र ही हमारे संस्थान में संपर्क कर सकते हैं। इस रुदाक्ष माला में आपको आपके लग्न के अनुसार तीन भाग्योदय कारक अभिमंत्रित रुद्राक्ष प्रदान किये जाते हैं।

राजयोग कारक रुद्राक्ष माला-

 

यदि आप अपनी लग्नानुसार सिद्ध राजयोग कारक रुद्राक्ष माला प्राप्त करना चाहते हैं तो हमारे संस्थान में संपर्क कर सकते हैं। इस रुद्राक्ष माला में आपको आपके लग्न के अनुसार तीन राजयोगकारक अभिमंत्रित रुदाक्ष प्रदान किये जाते हैं।

रुद्राक्ष, विशेष रुद्राक्ष, भाग्योदय कारक रुद्राक्ष माला  एवं राजयोग कारक रुद्राक्ष माला प्राप्त करने के लिए संपर्क करें-
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र
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"पेटीएम" भुगतान उपलब्ध है-


ग्रहशांति कार्य 


हमारे यहां उच्च प्रशिक्षित विद्वान ब्राह्मणों द्वारा ग्रहशांति कार्य,जाप एवं हवन-अनुष्ठान आदि का कार्य करवाया जाता है।

संपर्क करें-“प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र”
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